सोनम वांगचुक के समर्थन में बढ़ा सियासी और फिल्मी जगत का साथ, भूख हड़ताल पर दिल्ली हाई कोर्ट में भी पहुंचा मामला
नई दिल्ली: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आंदोलन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा यह विरोध प्रदर्शन अब 25वें दिन में प्रवेश कर चुका है। 59 वर्षीय सोनम वांगचुक 28 जून को इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे और तभी से उन्होंने अभियान के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी।
जैसे-जैसे उनकी सेहत को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे देश के राजनीतिक दलों, फिल्म जगत और साहित्य से जुड़े कई प्रमुख चेहरे खुलकर उनके समर्थन में सामने आए हैं। वहीं, उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को लेकर मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई होने वाली है।
25वें दिन भी जारी है भूख हड़ताल
सोनम वांगचुक का अनशन लगातार जारी है। समर्थकों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। हालांकि, लंबे समय से भोजन न लेने के कारण उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।
डॉक्टरों और समर्थकों के अलावा कई सार्वजनिक हस्तियों ने भी उनसे स्वास्थ्य का ध्यान रखने और भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की है।
कई विपक्षी नेताओं ने जताया समर्थन
वांगचुक के आंदोलन को लेकर विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से अपना समर्थन व्यक्त किया है। समर्थन देने वालों में कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं।
इनमें प्रमुख नाम हैं—
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी
कांग्रेस सांसद शशि थरूर
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और विधायक आतिशी
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा
सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास
टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष
समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज
एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार
टीएमसी नेता साकेत गोखले
एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता अनीश गवांडे
इन नेताओं ने विभिन्न माध्यमों से वांगचुक के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए उनकी मांगों पर संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया है।
फिल्म और साहित्य जगत से भी मिला साथ
सोनम वांगचुक को केवल राजनीतिक समर्थन ही नहीं, बल्कि फिल्म, साहित्य और कला जगत की कई चर्चित हस्तियों का भी साथ मिला है।
समर्थन देने वालों में शामिल हैं—
अभिनेत्री शबाना आज़मी
अभिनेत्री जीनत अमान
अभिनेता प्रकाश राज
गायिका चिन्मयी श्रीपदा
हास्य कलाकार वीर दास
अभिनेता ओमी वैद्य
लेखिका अरुंधति रॉय
अभिनेता नसीरुद्दीन शाह
अभिनेत्री रत्ना पाठक शाह
अभिनेत्री सोनी राजदान
अभिनेत्री स्वरा भास्कर
इनमें से कई हस्तियों ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के माध्यम से वांगचुक के आंदोलन के प्रति समर्थन जताया है। साथ ही उन्होंने उनकी सेहत को लेकर चिंता भी व्यक्त की है और उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है।
दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा मामला
सोनम वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।
याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाएं ताकि वे वांगचुक से बातचीत करें और उनकी भूख हड़ताल समाप्त कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि वह इस याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करेगा।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ के समक्ष यह मामला आया।
हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की हड़ताल के कारण संबंधित सरकारी पक्ष की ओर से कोई उपस्थित नहीं हो सका। इसके बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई अगले दिन के लिए स्थगित कर दी।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रति संबंधित एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और दिल्ली सरकार के वकील को उपलब्ध कराई जाए ताकि अगली सुनवाई में आवश्यक पक्ष उपस्थित हो सकें।
जनहित याचिका में क्या मांग की गई?
याचिका राकेश कुमार सैनी द्वारा दायर की गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि यह स्थिति अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है क्योंकि एक नागरिक लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठा है और उसका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है।
याचिका में अदालत से मांग की गई है कि—
संबंधित अधिकारी वांगचुक से तत्काल बातचीत करें।
उनकी मांगों पर संवाद शुरू किया जाए।
उनकी जान की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
आवश्यक होने पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप किया जाए।
याचिका में वांगचुक को जबरन भोजन (Force Feeding) कराए जाने का अनुरोध भी किया गया है। हालांकि, इस मांग पर अंतिम निर्णय अदालत द्वारा सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ रही चिंता
लंबे समय तक चलने वाली भूख हड़ताल के कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार निगरानी की आवश्यकता पर बल देते हैं।
चिकित्सकों के अनुसार, लंबे समय तक भोजन न लेने से शरीर में पानी और पोषण की कमी, रक्तचाप में गिरावट, मांसपेशियों की कमजोरी तथा अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
हालांकि, सोनम वांगचुक की वर्तमान चिकित्सकीय स्थिति को लेकर विस्तृत आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया है।
शांतिपूर्ण आंदोलन और लोकतांत्रिक अधिकार
भारत के संविधान के तहत नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार प्राप्त है। वहीं, प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखे।
ऐसे मामलों में अदालतें अक्सर जीवन के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर बल देती हैं।
आगे क्या?
अब इस पूरे मामले पर सबकी नजर दिल्ली हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है। अदालत यह तय करेगी कि जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दों पर किस प्रकार की कार्रवाई आवश्यक है। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि प्रशासन और संबंधित पक्ष वांगचुक के स्वास्थ्य और आंदोलन को लेकर क्या रुख अपनाते हैं।
जंतर-मंतर पर जारी सोनम वांगचुक का अनशन अब केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। राजनीतिक दलों, कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के समर्थन के बीच उनकी सेहत को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका ने इस मुद्दे को कानूनी आयाम भी दे दिया है। अब सभी की निगाहें अदालत की सुनवाई और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जबकि समर्थक संवाद के जरिए समाधान निकलने की उम्मीद जता रहे हैं।

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